तक्षित साहित्य धारा

कैसे मनाएं दीवाली…..?

गीत


अशोक आनन
मक्सी ( शाजापुर )

कैसे मनाएं दीवाली…..?
बापू !
कैसे मनाएं हम दीवाली …..?
तेल , दीये , रुई –
है पहुंच से बाहर ।
कैसे प्रकाशित हो –
घर , देहरी , द्वार ।
बापू !
कैसे सजाएं पूजन – थाली…..?
महंगाई इतनी –
अबकी पुता न घर ।
लिपा-छबा घर-आंगन –
न सुधरा छप्पर ।
बापू !
कैसे मिटाएं रातें काली…..?
घर भी हो गया –
अंधकार का आदी ।
तम में नहाई है –
आधी आबादी ।
बापू !
कैसे बुलाएं घर खुशहाली…..?
फटे वसनों में –
घर का बदन झांकता ।
भूख़ा घर –
दिनभर हवा फांकता ।
बापू !
कैसे भगाएं आज रुदाली…..?

Dr. Sanjay Nagar

Author & Co-Founder Takshit News

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