तक्षित साहित्य धारा

अनमोल उपहार

लघुकथा


मीरा जैन
516, साँईनाथ कालोनी .सेठीनगर
उज्जैन . – (म.प्र.) पिन -456010
दीपावली की खुशियां कम भी नही हुई थी कि भाई दूज पर अनायास ही पूरे मोहल्ले में खुशियों की बरसात हो गई, क्या युवा क्या बुजुर्ग सभी के चेहरों पर हर्ष के साथ असीम शांति व्याप्त थी। निश्चिंत हो सारे बुजुर्ग एक दूसरे से यूं गले मिल रहे थे जैसे बरसों के बिछड़े हों खुशी से गले मिल रहे थे। जैसे बरसों के बिछड़े हों, खुशी इतनी की जुबान से बयां नहीं की जा रही थी। इन सब का मात्र एक ही कारण युवाओं द्वारा गत रात की गई मीटिंग-विषय था
‘भाई दूज के अवसर पर भाई, बहनो को ऐसा कौन सा उपहार दें जिससे पूरे परिवार में हर्षोल्लास का वातावरण निर्मित हो जाए।’
भाई दूज के दिन नियत समय पर भोजनादि के पश्चात बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक निकाला तो भाइयों ने एक लिफाफा दिया। जैसे ही बहनों ने लिफाफा खोला उसके अंदर रूपयों के स्थान पर एक पत्र था जिसे पढ़कर उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए और वह लिफाफे उन्होंने माता-पिता की ओर बढ़ा दिये, पालकों ने जैसे वह पत्र पढ़ा उनकी मुख्य चिंता एक बार में ही समाप्त हो गई, पत्र में लिखा था-
“बहना ! मै शपथ लेता हूं कि जीवन में कभी भी लिव इन रिलेशनशिप में नहीं रहूँगा।”

Dr. Sanjay Nagar

Author & Co-Founder Takshit News

Related Articles

Back to top button