डिलीटेड मेसेज

संतोष सुपेकर उज्जैन
“सर आप अपनी रचनाएँ सेव कर कहाँ रखते हैं? मेल में, या वर्ड फाइल में?” कार्यक्रम के बाद प्रसिद्ध लेखक वरूण दास जी से पूछा मैंने।
“दोनों जगह में से कहीं नहीं, ये देखो” और उन्होंने अपना मोबाइल फोन मुझे दिखाया।
“ये मेरा पर्सनल वाटस एप ग्रुप है, इसमें सिर्फ मैं हूँ!”
“ओह!” मैंने नई दिलचस्पी से उनके फोन को देखा।
“और अब ये ताज़ा रचना भी पढ़ो।”
“वाह! क्या खूब लिखी है सर?” पढ़कर और स्क्रीन को अंगुली से खिसकाते हुए मैंने कहा, “वाकई बहुत डूबकर, तन्मयता से और बहुत श्रम से लिखी है आपने यह रचना !”
“कैसे पता चला कि बहुत श्रम से लिखी गयी है?”
“रचना का शिल्प देखकर तो लगा ही, इस रचना के ठीक ऊपर … यू डिलीटेड दिस मेसेज … यू डिलीटेड दिस मेसेज….वाला संदेश चौबीस बार अंकित है! जो कि निश्चित ही इसी रचना के कमजोर ड्राफ्ट होंगे.. स्पष्ट है कि पच्चीसवीं बार में फाइनल हुई है यह अद्भुत रचना !”
