नागरिकता बोध: विकसित राष्ट्र की असली पहचान
नितिन पोल उज्जैन

किसी भी देश की प्रगति का पैमाना बड़े-बड़े फ्लायओवर, मॉल, एयर पोर्ट, नागरिकों की आर्थिक क्षमता को माना जाता है। परंतु उसके नागरिकों की जागरूकता, जिम्मेदारी और कर्तव्य-बोध कितना है, यह भी एक पैमाना होता है। नागरिकता बोध का अर्थ है-अपने देश, समाज और आसपास के वातावरण के प्रति अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझना तथा उनका ईमानदारी से पालन करना। हमारी सभ्यता इतनी प्राचीन होने के बाद भी आज हमारे समाज में नागरिकता बोध का अभाव एक गंभीर समस्या है। नागरिकता बोध का अर्थहमें अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी ज्ञान होना चाहिए। दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना नागरिकता बोध के प्रमुख उदाहरण हैं। देशभक्ति सिर्फ यह नहीं कि हम सीमा पर जाकर लड़े या राष्ट्रीय त्योहारों पर राष्ट्रीय ध्वज लेकर, वंदेमातरम गाकर, जोर-जोर से नारे लगाये, अपने वाहन पर तिरंगा लगाये बल्कि नागरिकता बोध रखकर अपने कर्तव्य का पालन करें तो वह भी देशभक्ति है। हम सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाये रखें, ट्रैफिक नियमों का पालन करें, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाये, वैमनस्यता न फैलायें, दुर्घटना में घायल का विडियो बनाने की जगह उसे मेडिकल सहायता उपलब्ध करायें, जैसी बातों का पालन करना भी देशभक्ति है। नागरिकता बोध की कमी के अनेक कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण है कि बच्चों को शालेय स्तर पर नागरिक शास्त्र शिक्षा का अभाव। कम उम्र में सिखाई गयी बातें जीवनभर की पूंजी होती हैं। इस शिक्षा की कमी के कारण बच्चा बड़े होकर सच्चा नागरिक नहीं बन पाता। इस वजह से सामाजिक जिम्मेदारी और कानूनों के पालन में उदासीनता निर्मित होती हैं। हम यह सोचते हैं कि देश और समाज की जिम्मेदारी केवल सरकार की है, जबकि वास्तव में राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यह सोचना कि मेरे अकेले के करने से क्या होगा? यह अकेले मिलकर 146 करोड़ होते हैं। नागरिकता बोध की कमी के कारण पानी और बिजली की बर्बादी तथा पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं। लोग अपने छोटे-छोटे स्वार्थों के लिए समाज के संप हितों की अनदेखी करने लगते हैं। इससे सामाजिक वैमनस्य फैलता है, अनुशासन कमजोर होता है और देश के विकास की गति भी प्रभावित होती है। नागरिकता बोध विकसित करने के लिए परिवार और विद्यालय की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। बच्चों को बचपन से ही अनुशासन, स्वच्छता, सहयोग, ईमानदारी और देश के प्रति जिम्मेदारी का संस्कार दिया जाना चाहिए। विद्यालयों में नागरिक शास्त्र और सामाजिक जिम्मेदारियों को व्यवहारिक रूप से समझाया जाना चाहिए। सरकार को भी कानूनों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना चाहिए। नागरिकता बोध में वृध्दि के लिए जनचेतना अभियान शासकीय तथा सामाजिक स्तर पर चलाया जाना चाहिए। हम एक मजबूत और विकसित राष्ट्र का निर्माण जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनकर कर सकते हैं। हमें यह समझना होगा कि देश के प्रति हमारा कर्तव्य केवल राष्ट्रीय पों पर देशभक्ति का प्रदर्शन नहीं। अपने दैनिक जीवन में नियमों का पालन करना, स्वच्छता रखना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना भी सच्ची देशभक्ति है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को सिर्फ अधिकारों के प्रति नहीं, बल्कि कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक होना चाहिए। जागरूक नागरिक ही मजबूत राष्ट्र की आधार स्तंभ होते हैं।