तक्षित साहित्य धारा

जय माँ काली जय जगदम्बे


श्रीमती रेणु इनानी
26 निकास चौराहा उज्जैन

जय माँ काली जय जगदम्बे हरसिद्धि माँ आओं ना भारत की इस पुण्य भूमि को फिर से दिव्य बनाओ माँ ।।
कदम कदम पर महिसासुर तो अपना रूप दिखाते है नन्हीं नन्हीं कलियों पर तो अपने दांत गड़ाते है
तैरे आंगन की सब बेटी आज डरी है दुष्टों से
जल्दी आ कर मुक्त करा दो मॉ इन सारे कष्टों से
हाथ में खप्पर खड्ग को धारों इनसे मुक्त कराओं मॉ जय माँ काली जय जगदम्बे हरसिद्धि माँ आओं ना भारत की इस पुण्य भूमि को फिर से दिव्य बनाओ माँ ।।
कदम कदम पर अपराधों के घोर बंवडर छाये है
माँ इनसे तो करो सुरक्षा तेरी शरण हम आयें है सीमाओं पर आज असुरों ने तो डेरा डाला है
काली आंधी भभक रहीं है बादल दिखता काला है
मुण्ड माल को धारण करके फिर तलवार उठाओं मॉ जय माँ काली जय जगदम्बे हरसिद्धि माँ आओं ना भारत की इस पुण्य भूमि को फिर से दिव्य बनाओं मॉ
देहिक देविक भौतिक तापों की घनधारे हवांए है मानवता तो सिसक रहीं है घायल सभी फिजाएं है भाई भाई और पिता पुत्र के बीच पड़ी दिवार है
हर एक आंगन हर एक रिश्तों में कैसी टकरार है
आज हजारों कानून है पर लाखों यहाँ मर जाते है चौराहों पर टक्कर होती विकसित हमें बताते है
झूठ फरेबी इन बातों से हमको आज बचाओं मॉ
जय माँ काली जय जगदम्बे हरसिद्धि माँ आओ ना भारत की इस पुण्य भूमि को फिर से दिव्य बनाओं मॉ
गड़कालिका माँ चामुण्डा नगरकोट महारानी है
भूखी माता चौसठ योगिनी गढ़ पर रहीं भवानी है चौबीस खम्बा वाली माता तुलजा मात जगाते है
जय माँ गौरी जय माँ दुर्गे हम तो तुम्हें मनाते है
गंगा जमुना मात सरस्वती क्षिप्रा लहर उठाओं मॉ
जय माँ काली जय जगदम्बे हरसिद्धि माँ आओं ना भारत की इस पुण्य भूमि को फिर से दिव्य बनाओ माँ ।

Dr. Sanjay Nagar

Author & Co-Founder Takshit News

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