तक्षित साहित्य धारा

समय


नृसिंह इनानी
26 निकास चौराहा, उज्जैन

इस जीवन का तोल मोल किंचित करना जो जान गया
सही समय को जिसने जाना समय उसे पहचान गया ll
आपा धापी छीना झपटी प्रतियोगिता दिखती है
नासमझी का दौर बताता फूहड़ताएँ बिकती है
कभी आस के विपरीत प्रतिफल घोर अंधेरे लाते है
जो समय हाथ से गुजर गया वो पल पल बड़ा सताते है
कुछ पल खाली हाथ दिखा के लगा सभी अरमान गया
सही समय को जिसने जाना समय उसे पहचान गया ll
इस जीवन का क्रम निश्चित है समय सभी को मिलता है
पूरब में सूरज उग जाता और ताल कमल संग खिलता है
पक्षी का कलरव निश्चित है सरिता की कलकल निश्चित है
फिर समय का रोना रो रो कर तू बेमतलब ही चिंतित है
जो वक्त गुजारा ख़ाली था यूं लगा कहीं तूफान गया
सही समय को जिसने जाना समय उसे पहचान गया ll
समय का दुश्मन स्वयं बना बे लगाम मन का घोड़ा
जीवन की तिरछी राहों पर फिरता है दौड़ा दौड़ा
जो सत्य भूलकर झूठे क्रम को जीवन मे अपनाते है
वही झूठ के रथ पर चढ़ कर खुद को व्यस्त बताते है
एक लक्ष्य बना कर निकल पड़ा वो मंजिल को पहचान गया
सही समय को जिसने जाना समय उसे पहचान गया ll
अवसरवादी एक गाली,अवसर जीवन का सोना है
हर अवसर का है मोल यहॉं कोई अवसर कभी न खोना है
बचपन मे पुस्तक समय बनी जो यौवन कर्म को पूज गया
वो कर्मवीर महाकाल बना और समय उसी को पूज गया
है समय नही मुझको मिलता यूं रो रो कर बेकाम गया
सही समय को जिसने जाना समय उसे पहचान गया ll
हो जय जयकार सदा मैरी वह समय खोजता फिरता है
बन कर्महीन मठ्ठा बनकर निष्कर्म कीच में गिरता है
ये समय बड़ा बलशाली है तुझको खोटी कर जाता है
तू भाग्य हीन कुंठित है ऐसे भाव हृदय भर जाता है
जिसने कुंठा को पकड़ लिया समझो उसका भगवान गया
सही समय को जिसने जाना समय उसे पहचान गया ll
तू सृष्टिपुंज है सृष्टि का तब ही धरती पर आया है
तुझको मॉनव का रूप मिला कई शक्ति से भर पाया है
दुःख और सुख से ऊपर उठकर तू जीवनपथ पर चलता जा
दे कर प्रकाश अँधियारो को एक अखंड दीप सा जलता जा

Dr. Sanjay Nagar

Author & Co-Founder Takshit News

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