तक्षित साहित्य धारा
आंकेगा कौन ……?

डा. इसरार मोहम्मद ख़ान,
57/ए पार्श्व कुंज,कनाडियन रोड,खजराना,इंदौर
आंकेगा कौन? मेरे मनवे का मोल।
तैर रहे अधरों पे रसभीगे बोल।।
मन में उमंग लिये, बैठा ये कौन?
तकता क्षितिज को, रह- रहके मौन।
फुनगी पे मनपाखी पंख रहा खोल।
तैर रहे अधरों पे……
क्षण ही तो बीता है, गये हुए तुमको।
सौ- सौ बरस बीते, लगते हैं हमको।
हिरदे में तुमरे ही चित्र रहे बोल।
तैर रहे अधरों पे……
मधुगंधी छाँव सी, यादें तुम्हारी।
तरसे दरस को, अंखियां हमारी।
छिपा इन आंखों में, प्रेम का भूगोल ।
तैर रहे अधरों पे…….
