तक्षित साहित्य धारा

नारी महात्म्य

नवरात्रि विशेष

नारी महात्म्य
-जीवन प्रकाश आर्य


आज तो
रवि भी विनत है
मातृ पद अभ्यर्थना में ।
यह समूची सृष्टि भी
संलग्न
मां की अर्चना में ।
कभी भगिनी रूप
ले कर,
कभी आत्मजा
दुहिता बन कर।
कभी प्रिया की
मुद्रा, धर कर ।
तुम निरत ,
नव सर्जना में ।
मातृपद …
तुम ममत्व का
मधुर पल्लवन,
प्रीति प्रणय का
गाढालिंगन।
जीवन भर का
मौन समर्पण।
सृष्टि का कण-कण
तुम्हारी साधना में ।
मातृपद …
तुम में
ब्रह्मा की क्षमताएं ,
तुम में
वैष्णव तत्व समाहित ।
तुम शंकर सी
गरल पायिनी,
और तुम्हीं
श्रृद्धा श्रृंगारित।
स्वयं विधाता,
शिशु बनते हैं,
नारी की
अंतर्रचना में ।
मातृपद …
पंचभूत का
मृदु स्पंदन,
सम्मोहक स्मित
अभिसिंचन ,
दग्ध हृदय पर
चंदन लेपन,
तुम पीड़ा का ,
जीवित क्रंदन।
तुम मुखरित हो,
तुम्हीं व्याप्त हो,
भावों की
हर अल्पना में।
मातृपद …
शुष्क मरुस्थल से
जीवन में,
प्रेम सलिल का
तुम अनुरंजन।
घोर निराशा मग्न
हृदय में ,
आस दीप का
तुम संदीपन।
तुम प्रतिमा में,
तुम पूजा में,
तुम ही
हर कोमल रचना में ।
मातृपद …
तुम ने
मनुज मात्र को सिरजा,
जड़ घर का
श्रृंगार किया है।
स्वजनों की
पीड़ा के विष को
तुम ने
सौ सौ बार पिया है।
तुम से ही
पूजित है तुलसी
हर घर के,
जीवित अंगना में ।
मातृपद …
पुरुष दर्प का
प्रखर प्रभंजन,
अन्ध मूढ,
उन्मादी यौवन।
प्रेम मधुर स्मित में
बंधकर ,
बन जाता है ,
सिरजन, पोषण।
तुम ही तो
बिंबित होती हो,
उन्माद की
अनुरंजना में।
मातृपद …

Dr. Sanjay Nagar

Author & Co-Founder Takshit News

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