तक्षित साहित्य धारा
शारदीय चांद
गीत
-अशोक आनन
मक्सी (शाजापुर )

शारदीय चांद
आओ !
शरद की जुन्हाई में बैठें ।
शारदीय चांद –
अपने शवाब पर है ।
चांदनी रात भी –
अपने आब पर है ।
आओ !
प्यार की अमराई में बैठें ।
चांद भी –
झील में डुबकियां लगा रहा ।
चुपके से –
वह चांदनी को बुला रहा ।
आओ !
हृदय की अंगनाई में बैठें ।
चांदनी –
चांदनी में है प्रतीक्षारत ।
चांद की –
अनुपम छबि निहारे अनवरत ।
आओ !
हम मंद पुरवाई में बैठें ।
चांद धरा पर –
बरसा रहा है अमरित ।
प्यार की –
वीणा के तार हुए झंकृत ।
आओ !
रात की तनहाई में बैठें ।
